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लैंड पूलिंग योजना का लाभ मिलने में लगेंगे वर्षो

Posted By : Jul 09 2018

Posted On : Delhi Lpp

 

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की लैंड पूलिंग योजना की जन सुनवाई भले पूरी हो गई हो, लेकिन इसे साकार रूप लेने में अभी वर्षो लगेंगे। पॉलिसी की कई शर्तो को पूरा करना भी इतना सहज नहीं है। इस हकीकत को डीडीए भी मान रहा है।

जानकारी के मुताबिक, फिलहाल जन सुनवाई बोर्ड इसकी रिपोर्ट तैयार करने में लगा है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में होने वाली डीडीए बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद ही अधिसूचना जारी की जाएगी। अधिसूचना के बाद डीडीए इस पॉलिसी के तहत लोगों से आवेदन आमंत्रित करेगा। इसके आगे की प्रक्रिया इसी पर निर्भर करेगी कि कितने लोग आवेदन करते हैं और कुल कितनी जमीन का प्रस्ताव डीडीए को मिलता है।

अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 24 हजार हेक्टेयर जमीन ऐसी है, जो लैंड पूलिंग के दायरे में आती है। इसमें से ज्यादातर कृषि की भूमि है, जिसका स्वामित्व किसानों के पास है। डीडीए ने शर्त रखी है कि जिस भी जगह के भू स्वामी इस पॉलिसी में शामिल होना चाहते हैं, उनके पास वहां की खाली पड़ी जमीन का कम से कम 70 फीसद हिस्सा होना चाहिए। तभी डीडीए वहां इसके लिए मंजूरी देगा। इसके लिए डीडीए को प्रति हेक्टेयर एक से दो करोड़ रुपये का विकास शुल्क भी देना अनिवार्य होगा। यही वजह है कि जन सुनवाई के दौरान भी अधिकतर किसानों ने डीडीए से ऐसी जमीन का अधिग्रहण ही करने का अनुरोध किया था।

अधिकारी बताते हैं कि लैंड पूलिंग के तहत जमीन में 40 एवं 60 का अनुपात रखा गया है। 60 फीसद जमीन पर उसके स्वामियों द्वारा निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसमें भी 53 फीसद हिस्सा रिहायशी निर्माण, पांच फीसद कमर्शियल और दो फीसद संस्थागत निर्माण के लिए तय किया गया है। 40 फीसद जमीन पर डीडीए सड़कों, पार्क, सामुदायिक भवन और सीवरेज लाइन वगैरह बुनियादी सुविधाएं विकसित करेगा।

बताया जाता है कि 70 फीसद जमीन एकत्र करने और डीडीए को बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए शुल्क अदा करना सबसे टेढ़ा मामला है। यह प्रक्रिया बिल्डर लॉबी तो कर सकती है, लेकिन आम जनता व किसानों के लिए मुश्किल है। जहां कहीं भी इस पॉलिसी पर काम होगा, वहां पर भी उक्त सारी सुविधाएं विकसित होने और निर्माण कार्य पूरा होने में कई साल लगना तय है।

देखिए, जमीन थोड़ी ज्यादा होगी, तभी वहां लैंड पूलिंग का सही लाभ मिल पाएगा। विकास शुल्क इसलिए रखा गया है ताकि डीडीए वहां पर बुनियादी सुविधाएं विकसित करवा सके। रही बात समय लगने की तो इसमें पांच से सात साल लग सकते हैं। बुनियादी सुविधाएं तैयार करने और बहुमंजिली मकान बनाने में वक्त तो लगेगा ही।

Source From:-  https://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-land-pooling-scheme-in-delhi-18170678.html