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लैंड पूलिंग विकास का नया रास्ता : हरदीप पुरी

Posted By : Sep 14 2019

Posted On : Delhi LPP

 

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को ‘लैंड पूलिंग : बिल्डिंग इंडियाज कैपिटल’ विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि शहरी विकास में सार्वजनिक निजी भागीदारी पर आधारित लैंड पूलिंग नीति दिल्ली के विकास का एक नया फ्रेमवर्क है।

पुरी ने बताया कि छह सितंबर 2019 तक पोर्टल के जरिये करीब साढ़े छह हजार हेक्टेयर जमीन पंजीकृत की गई। इसमें सबसे ज्यादा पंजीकरण जोन एन के लिए किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रति एक हजार हेक्टेयर भूमि में करीब 85 हजार आवासीय इकाइयों में 3,85,000 लोगों के लिए रहने की व्यवस्था होगी। नई नीति के तहत करीब 17 लाख आवासीय इकाइयों का निर्माण होगा, जिनमें से 5 लाख से भी अधिक आवासीय इकाइयां समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए होंगी।

जल्द शुरू होगा मेट्रो कॉरिडोर का काम : इस दौरान पुरी ने बताया कि दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण में रुके हुए तीनों कॉरिडोरों को जल्द ही स्वीकृति दी जाएगी। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अर¨वद केजरीवाल का नाम लिए बिना कहा, सभी को पता है कि यह कॉरिडोर किसकी वजह से रुके हुए हैं, लेकिन अब बहुत देर नहीं लगेगी। केंद्र सरकार अगले कुछ ही माह में रिठाला-बवाना-नरेला, इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ, लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक कॉरिडोर को भी हरी झंडी दिखा देगी।

वहीं उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि लैंड पूलिंग नीति की सफलता काफी हद तक शहर के बुनियादी ढांचे के तेज, समयबद्ध नियोजन, विकास और पूंजी निवेश पर निर्भर करती है। ये इन क्षेत्रों के एकीकृत विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। बैजल ने कहा कि यह सम्मेलन पूलिंग नीति को सफल बनाने की दिशा में निवेशकों, साङोदारों, रियल एस्टेट डेवलपरों, बैंकिंग क्षेत्र और विशेषज्ञों को एक साथ लाने का एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि 109 लैंड पूलिंग क्षेत्रों में इस्तेमाल किए गए स्मार्ट सिटी समाधान इन नए शहरी केंद्रों को ‘स्मार्ट पड़ोस’ में बदल देंगे। नीति के तहत प्रस्तावित शहर स्तर के विकास से इन ग्रीन फील्ड क्षेत्रों में हाई स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम, विश्व स्तरीय ढांचागत सुविधाएं यानी 24 घंटे पानी की आपूर्ति, बिजली, पाइप गैस कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा मिलेंगी।

सम्मेलन का आयोजन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा किया गया था। इस अवसर पर उपराज्यपाल अनिल बैजल, डीडीए के उपाध्यक्ष तरुण कपूर, फिक्की रियल एस्टेट कमेटी के प्रबंध निदेशक संजय दत्त के अलावा अनेक नगर नियोजक और बिल्डर भी उपस्थित थे।

बेहतर एफएआर से मिलेगा लाभ: लैंड पूलिंग नीति पर फिक्की में हुए सम्मेलन में यह भी सामने आया कि लैंड पूलिंग के तहत दिल्ली में निवेश करने वाले निवेशकों को फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) में छूट दी जाएगी। इसके लिए उन्हें कम कीमत पर बेहतर जमीन मुहैया कराई जाएगी।

सम्मेलन में बिल्डरों ने भी अपनी बात रखी। एक सत्र में फिक्की रियल एस्टेट कमेटी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक संजय दत्त ने कहा कि सरकार ने बेहतर नीति बनाई है। सरकार को बिल्डरों को स्टाम्प ड्यूटी कम करने की दिशा में भी काम करना चाहिए। साथ ही बाहरी विकास शुल्क (ईडीसी) और जमीन फ्री होल्ड या लीज पर देने के निर्णय में भी राहत देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सिंगल ¨वडो से ही बिल्डर को सभी अनुमतियां देने की पहल करनी चाहिए।

नीति को अधिक स्पष्ट बनाने की जरूरत : सम्मेलन में मौजूद बिल्डरों ने अलग-अलग जमीन के मालिकों के एक साथ आकर जमीन जोड़ने को बड़ी बाधा बताया। दिनेश डावर ने कहा कि नीति स्पष्ट नहीं है। पहले नीति में ईडीसी की राशि तय थी, लेकिन नई नीति में इसे लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। लोगों के एकजुट होकर आने में भी कई दिक्कतें सामने आएंगी। हालांकि कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि यह भ्रांति है।

पुणो के मगरपट्टा मॉडल को सराहा: पुणो में 185 किसानों ने 450 एकड़ जमीन एकजुट कर उस पर लैंडपूलिंग योजना के तहत मगरपट्टा कॉलोनी बसाई। कार्यक्रम में मगरपट्टा को बसाने को लेकर प्रजेंटेशन दिया गया है। इस कॉलोनी को लैंडपूलिंग का बेहतरीन उदाहरण बताया गया है, जिसकी सराहना की गई। कॉलोनी के निर्माण और संचालन में सभी को शेयर दिया गया है। इससे किसानों के जीवन में परिवर्तन आया है। इसकी सफलता के बाद पुणो में लैंडपूलिंग योजना पर दो नई कॉलोनी बसाई जा रही हैं।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पुरी ने शुक्रवार को कहा कि संसद भवन तथा सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास की सरकार की मेगा योजना और विभिन्न मंत्रलयों के लिए एक समग्र परिसर का निर्माण कार्य अगले साल शुरू हो सकता है। यह बयान उन्होंने फिक्की सभागार में डीडीए के लैंड पूलिंग सम्मेलन में दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर मंत्री की यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है।

राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किमी के दायरे में मौजूद सेंट्रल विस्टा को पुनर्विकसित करने की मेगा योजना के तहत मोदी सरकार ने संसद भवन, एकीकृत केंद्रीय सचिवालय और सेंट्रल विस्टा के विकास या पुनर्विकास के लिए प्रस्ताव मांगा है। संसद भवन के स्थान और डिजाइन के बारे में पूछे जाने पर पुरी ने कहा कि इन पहलुओं पर अभी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मध्य अक्टूबर तक हम निविदा (डिजाइन के लिए) जारी कर सकेंगे और अगले साल तक निर्माण शुरू हो सकता है। इससे पहले अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना का जिक्र किया जिसके तहत रायसीना हिल से लेकर इंडिया गेट तक फैले सरकारी कांप्लेक्स के पुनर्विकास की योजना है। इसमें नार्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक तथा संसद भवन परिसर शामिल हैं। पुरी ने कहा, अगले चुनाव के समय यानी 2024 में जब हम मिलेंगे, उम्मीद है कि हम नए संसद भवन में होंगे।

किसी भी आकार की भूमि को किया जा सकता है पूल

जमीन मालिक या मालिकों का समूह क्षेत्र विकास योजना (जेडडीपी) में परिसीमन किए गए क्षेत्रों के आधार पर निर्धारित मानदंडों और दिशा-निर्देशों के अनुसार विकास के लिए किसी भी आकार की भूमि को पूल कर सकते हैं। इसके तहत एकत्रित की गई 60 फीसद भूमि का विकास बिल्डरों या उनके समूह द्वारा आवासीय और वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए किया जाएगा, जबकि बाकी 40 फीसद भूमि का इस्तेमाल पानी, सीवरेज, बिजली आदि सहित विभिन्न शहरी स्तर की बुनियादी सुविधाओं के लिए उपयोग किया जाएगा।

Source From: https://epaper.jagran.com/epaper/14-sep-2019-4-delhi-city-edition-delhi-city-page-4.html